आरेफ का बड़ा बयान- ईरान की जीत का जश्न जल्द मनाया जाएगा
वॉशिंगटन/तेहरान: अमेरिका और ईरान के बीच दो सप्ताह के युद्धविराम के बाद एक बार फिर टकराव की स्थिति पैदा हो गई है। होर्मुज जलडमरूमध्य (स्ट्रैट ऑफ होर्मुज) में दोनों ओर से नए सिरे से सैन्य हमले शुरू होने की खबरें आ रही हैं। इस बीच ईरान के पहले उपराष्ट्रपति मोहम्मद रजा आरेफ ने बड़ा दावा करते हुए कहा है कि ईरानी जनता जल्द ही अमेरिका और इजराइल के विरुद्ध इस संघर्ष में एक ऐतिहासिक जीत का जश्न मनाएगी। उनके इस बयान ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कूटनीतिक और सैन्य हलचल बढ़ा दी है।
ईरान का दावा: जल्द हटेंगी पाबंदियां और होगी जीत
ईरानी उपराष्ट्रपति मोहम्मद रजा आरेफ ने युद्ध से प्रभावित उद्योगों और स्वास्थ्य सुविधाओं का जायजा लेते हुए कहा कि देश में पुनर्निर्माण का काम तेजी से चल रहा है। उन्होंने विश्वास जताया कि ईरानी लोगों के संघर्ष के परिणामस्वरूप जल्द ही उन पर लगी अंतरराष्ट्रीय पाबंदियां हटा ली जाएंगी। होर्मुज स्ट्रेट को ईरान का रणनीतिक हिस्सा बताते हुए आरेफ ने स्पष्ट किया कि ईरान इस जलमार्ग के प्रबंधन के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने जोर दिया कि ईरान क्षेत्र में अपना दबदबा कायम नहीं करना चाहता, बल्कि वह क्षेत्रीय सहयोग के जरिए इस इलाके को एक बड़ा आर्थिक केंद्र बनाने का पक्षधर है।
डोनाल्ड ट्रंप का रुख: युद्धविराम अभी भी प्रभावी
ईरान के आक्रामक बयानों और ताजा झड़पों के बावजूद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का कहना है कि दोनों देशों के बीच युद्धविराम अभी भी लागू है। ट्रंप ने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि यदि युद्धविराम टूटता, तो दुनिया को ईरान से उठती एक बड़ी सैन्य चमक के रूप में इसका तुरंत पता चल जाता। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि अमेरिका की ओर से ईरान को दिया गया शांति प्रस्ताव महज एक पन्ने का औपचारिक दस्तावेज नहीं है, बल्कि यह एक व्यापक और ठोस योजना है। इसमें स्पष्ट किया गया है कि ईरान के पास परमाणु हथियार नहीं होंगे और उसे अपने परमाणु कार्यक्रम से जुड़े महत्वपूर्ण संसाधन अमेरिका को सौंपने होंगे।
शांति के लिए पाकिस्तान की मध्यस्थता और नया प्रस्ताव
वर्तमान में ईरान और अमेरिका के बीच पाकिस्तान एक मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है। तेहरान इस समय पाकिस्तानी दूतों के जरिए मिले अमेरिकी संदेशों की समीक्षा कर रहा है। ट्रंप ने स्पष्ट किया है कि अमेरिका के प्रस्ताव में न केवल परमाणु हथियारों पर रोक शामिल है, बल्कि इसमें 'न्यूक्लियर डस्ट' और अन्य तकनीकी संसाधन भी मांगे गए हैं। यह स्थिति तब बनी हुई है जब रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण होर्मुज के जलक्षेत्र में तनाव बना हुआ है। अब पूरी दुनिया की नजर इस बात पर है कि ईरान अमेरिका के इस 'व्यापक प्रस्ताव' पर क्या आधिकारिक प्रतिक्रिया देता है।

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