भारतीय ऊर्जा क्षेत्र की बड़ी कामयाबी: लीबिया में मिला तेल और गैस का भंडार, 'ऑयल इंडिया' और 'IOC' को मिली सफलता

भारत की ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक बड़ी उपलब्धि हासिल हुई है। लीबिया में भारतीय कंपनियों के एक समूह (कंसोर्टियम) ने प्राकृतिक गैस और तेल (कंडेनसेट) के नए स्रोतों की खोज की है। पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने आधिकारिक तौर पर इस महत्वपूर्ण खोज की पुष्टि की है।

केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने इस सफलता पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए संबंधित कंपनियों को बधाई दी और इसे देश की ऊर्जा सुरक्षा के लिए एक मील का पत्थर बताया।


खोज का तकनीकी विवरण: गदामेस बेसिन

यह खोज लीबिया के प्रसिद्ध गदामेस बेसिन (कॉन्ट्रैक्ट एरिया 95/96) में की गई है। इस परियोजना की मुख्य विशेषताएं निम्नलिखित हैं:

  • साझेदार: इस परियोजना में ऑयल इंडिया लिमिटेड और इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (IOC) भारतीय समूह का हिस्सा हैं। परियोजना का संचालन (ऑपरेटर) अल्जीरियाई कंपनी SIPX द्वारा किया जा रहा है।

  • उत्पादन क्षमता: लगभग 8,440 फीट की गहराई तक की गई खुदाई के बाद सफल परीक्षण हुआ। यहां से प्रतिदिन:

    • 13 मिलियन क्यूबिक फीट प्राकृतिक गैस।

    • 327 बैरल कंडेनसेट (तरल हाइड्रोकार्बन) का उत्पादन प्राप्त हुआ है।

  • फॉर्मेशन: यह भंडार अविनात वानिन और अविन काजा फॉर्मेशन में पाया गया है।


भारत की ऊर्जा सुरक्षा पर प्रभाव

मंत्रालय के अनुसार, यह खोज भारतीय ऊर्जा कंपनियों के बढ़ते वैश्विक पदचिह्नों और अंतरराष्ट्रीय रणनीतिक साझेदारी की मजबूती को दर्शाती है।

  1. विदेशी संपत्तियों में निवेश: भारत अपनी ऊर्जा आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए विदेशों में तेल और गैस क्षेत्रों में निवेश बढ़ाने की रणनीति पर काम कर रहा है।

  2. आयात पर निर्भरता कम करना: सरकार का लक्ष्य है कि वर्ष 2030 तक घरेलू कच्चे तेल के उत्पादन को वर्तमान के 29 मिलियन मीट्रिक टन से बढ़ाकर 35 मिलियन मीट्रिक टन तक ले जाया जाए।

  3. नीतिगत सुधार: इस लक्ष्य को पाने के लिए केंद्र सरकार 'डिस्कवर्ड स्मॉल फील्ड पॉलिसी' और HELP (हाइड्रोकार्बन एक्सप्लोरेशन एंड लाइसेंसिंग पॉलिसी) जैसे सुधारों के जरिए अन्वेषण कार्यों में तेजी ला रही है।